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गजलों का ढाबा

Rishabh Bhatt

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            न कोई आतिशबाजी लाया,
        
                                                    
                            
न ही अपने साथ शोर शराबा,
दावत है, बुझा लो तलब,
खुला है नज़्मों, गजलों का ढाबा।

– ऋषभ भट्ट
3 महीने पहले
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