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सब बेउम्मीदों पर उतर रहे

Rinkee goswami

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सब बेउम्मीदों पर उतर रहे,
        
                                                    
                            
किससे उम्मीद लगाई जाए।
जब ठहरा पानी नदियों का,
तालाबों से क्या निकला जाए।
दर्द बयां किससे कर दें,
सब एक जहर ही खाएं हैं।
तुम हमसे कह दो हम तुमसे कह दें,
बस इससे मन को बहलाया जाए।
2 महीने पहले
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