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मंजिलें दूर हैं

Rinkee goswami

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ज़ख्म नासूर में तब्दील हो रहा है।
        
                                                    
                            
समंदर धीरे धीरे झील हो रहा है।
जो लक्ष्य दो कदम की दूरी पर था
अब वहीं हजारों मील हो रहा है।
एक महीने पहले
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