विज्ञापन

मंजिलें दूर हैं

Rinkee goswami

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ज़ख्म नासूर में तब्दील हो रहा है।
        
                                                    
                            
समंदर धीरे धीरे झील हो रहा है।
जो लक्ष्य दो कदम की दूरी पर था
अब वहीं हजारों मील हो रहा है।
एक घंटा पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Updesh Kumar

12492 कविताएं

View Profile

Ankit Kumar

10362 कविताएं

View Profile