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जिंदगी की उलझन

Rinkee goswami

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हुई न तो भी उलझन है,हुआ तो भी उलझन ही।
        
                                                    
                            
खुशी किसमें करी जाए, करी जाए तो उलझन ही।
खफा हम तुमसे हैं लेकिन, खफा तुम हमसे जाने क्यों
बताएं तो भी उलझन है,न बोले कुछ है उलझन ही।

ये दुनिया भी अगर रोकें, तुझे मंजिल को जाने तक।
नही रुकना नही थमना,बिना मंजिल के आने तक।
अगर पहुंचे नहीं तो ताने, दे देकर के मारेंगे
पहुंच जाओगे तो तुमको सुनाएंगे जमाने तक।
6 घंटे पहले
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