हुई न तो भी उलझन है,हुआ तो भी उलझन ही।
खुशी किसमें करी जाए, करी जाए तो उलझन ही।
खफा हम तुमसे हैं लेकिन, खफा तुम हमसे जाने क्यों
बताएं तो भी उलझन है,न बोले कुछ है उलझन ही।
ये दुनिया भी अगर रोकें, तुझे मंजिल को जाने तक।
नही रुकना नही थमना,बिना मंजिल के आने तक।
अगर पहुंचे नहीं तो ताने, दे देकर के मारेंगे
पहुंच जाओगे तो तुमको सुनाएंगे जमाने तक।
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