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हमारी बातों को समझने वाले कम हैं

Rinkee goswami

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हमारी बातों को समझने वाले कम हैं
        
                                                    
                            
किससे कहे कि कितने ग़म हैं।
किसी से बयां करें तो ग़लत न समझ ले
इसी डर से हमेशा चुप रहते हम हैं ।।
3 महीने पहले
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