विज्ञापन

पंछी और उसका अधूरा आसमान

Reena Mittal

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            पंछी और उसका अधूरा आसमान
        
                                                    
                            

एक पंछी था, जिसे मोहब्बत का मतलब नहीं पता था,
अपनी छोटी-सी दुनिया में रहता था, किसी से कोई वास्ता नहीं था।
न किसी के आने की चाह थी, न किसी के जाने का डर,
बस अपने पंखों पर भरोसा था, और अपना खुला-सा अंबर।

फिर कोई आया उसकी ज़िंदगी में, जो उसे अपना कहने लगा,
उसके सूने-से दिल में मोहब्बत के रंग भरने लगा।
उसे सिखाया किसी के लिए जीना, किसी की फ़िक्र करना,
किसी की एक मुस्कान के लिए, अपने सारे ग़म भूलना।

धीरे-धीरे पंछी को भी उस इंसान से प्यार हो गया,
उसके साथ रहते-रहते वही उसका संसार हो गया।
अब उसकी सुबहें उसी से थीं, उसी से हर शाम थी,
उसकी छोटी-सी दुनिया में बस उसी का नाम था।

मगर उस प्यार के बीच एक बात बार-बार आती थी,
पंछी के दिल में अनजाने डर की एक गाँठ छोड़ जाती थी।

वो कहता, “अगर कल मुझे कुछ हो जाए,
तो तुम अपनी ज़िंदगी में आगे बढ़ जाना।
अपना एक घर बसा लेना, किसी को हमसफ़र बना लेना,
मेरे जाने के बाद तुम ख़ुद को अकेला मत कर लेना।”

और फिर कहता, “मेरी बीवी है, मेरे बच्चे हैं,
वो मेरे बाद भी एक-दूसरे के सहारे रह लेंगे।
लेकिन तुम तो अकेले हो, तुम्हारा कौन होगा?
मेरे बाद तुम्हारे पास तुम्हारा अपना कौन होगा?”

वो ये बातें कहकर शायद पंछी की फ़िक्र करता था,
उसके आने वाले कल की चिंता में ये सब कहता था।
मगर कोई उस पंछी के दिल से भी तो पूछे,
जो हर बार ये सुनकर चुप हो जाता था,
और अपने ही प्यार के सामने ख़ामोश रह जाता था।

वो कैसे समझाए उसे कि उसे कोई दूसरा घर नहीं चाहिए,
जिसके साथ आज घर बसा है, उसके बिना कोई कल नहीं चाहिए।
उसे किसी नए हमसफ़र की तलाश नहीं है,
उसे तो बस उसी के साथ जीना है, जिसके बिना कोई आस नहीं है।

ऐ उसके अपने इंसान, तू क्यों बार-बार ये कहता है?
तेरे बाद घर बसा लेना, ये ख़याल उसके दिल में क्यों रहता है?
तू साथ है, फिर भी तेरे जाने का डर क्यों दे जाता है?
तेरा हर बार कहा हुआ ये लफ़्ज़, उसे भीतर तक रुला जाता है।

पंछी की बस इतनी-सी दुआ है—उस इंसान को कभी कुछ न हो,
क्योंकि उसे यक़ीन है, उस इंसान से पहले ही उसकी जान चली जाएगी।
और अगर कभी बिछड़ने का मौसम उसकी साँसों तक आ जाए,
तो उसकी आख़िरी धड़कन भी उसी का नाम गुनगुनाए।
क्योंकि उसके लिए मोहब्बत कोई अधूरी कहानी नहीं,
वो इंसान ही उसका आसमान है—और उसके बिना पंछी की कोई उड़ान नहीं।

- रीना मित्तल

 
एक घंटा पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Dn Chaubey

7393 कविताएं

View Profile

Updesh Kumar

13121 कविताएं

View Profile