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हक़ीक़त कविता

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            एक ओर सफलता है
        
                                                    
                            
एक ओर विफलता है
पर दोनों के पीछे
एक जीवन चलता है
सब किस्मत की बातें
सब समय पे होती है
बस बीच फसा इंसां
माथे को मलता है
हे राम ज़माने का
दस्तूर निराला है
दिल कोई भाता है
ले कोई चलता है
जब दिल टुट जाता है
या घर छुट जाता है
कुछ दर्द लिए दिल में
इक शायर पलता है
जब मजहब की बातें
ना दिल को भाती है
फिर किस के कहने पर
इंसान मचलता है
हर ओर उजाला है
हर छोर निराला है
बस इसके पीछे ही
इक बचपन जलता है
जो भूखा है कबसे
ना पूछ ने तुम आए
फिर पूछ रहे हम से
भूखा क्यों खलता है

जो अपना कहते थे
सब सपना हो बैठे
ये दर्द लिए दिल में
दिन इक इक ढलता है
एक और सफलता है
एक और विफलता है
पर दोनों के पीछे
एक जीवन चलता है  


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6 वर्ष पहले
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