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क ई सवाल मेरे इर्द गिर्द घूमते हैं

Rawat Rajni

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कई सवाल मेरे इर्द-गिर्द घूमते रहते हैं
        
                                                    
                            
कैसे कब क्यों क्या मुमकिन होता है
मैं डर से रातों को जागूं जहां सारा सोता है
मैं हर रोज बिखरा सा पाती हूं ख़ुदको फिर
थाम के उम्मीदों को हाथ फिर युद्ध में उतर आती हूं
छोटी छोटी जीत पर फिर पीट अपनी थपथपातीं
हौंसला देती हूं ख़ुदको और जज्बा जगाती हूं
हां हूं अकेली मगर तन्हा नहीं हूं मैं अब
खुद से करती हूं खुदकी बातें अपना ऐसे साथ निभाती हूं
मेरे कोशिश पे उंगलियों उठाते मेरे अपने लोग
देखती हूं उनको मुस्काती हूं और आगे बढ़ जाती हूं
कदमों कदमों नापे रास्ते दूरी कम करली हैं
कोशिश को मुकम्मल कामयाबी में गढ़ ली है
2 महीने पहले
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