वो मुझसे मेरी वफ़ा का फलसफा मांगते हैं
जो खुद बेवफा है वो हमसे क्या मांगते हैं
खुद पहन कर बेरंग मौसम का लिबास
मुझ से रंग-ए-बसंत का माह मांगते हैं
-रविन्द्र