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पुलवामा हमला

Ravi Yadav

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आऊँगा वापस बेटा ये, वादा देखो तोड गया,
        
                                                    
                            
नन्हे नन्हे हाथो की उंगली को देखो, छोड़ गया।
मिल आएंगे हमसे, वो इंतजार लगाए बैठी थी,
चूड़ी कंगन बिंदिया का, श्रंगार सजाए बैठी थी।
आस लगाए बैठी थी, बहना भैया के प्यार को,
बूढ़ा बाबा सोच रहा था, आएगा इस बार तो।
बारूदी विस्फोट हुआ, भारत का तारा टूट गया,
सुनी गोदी करके वो, माँ के आंचल से छूट गया।
स्वप्न सजाए जीवन के, कंगन ने बजना छोड़ दिया,
उसी काल की रातों में, चहरा सजना ने मोड़ दिया।
बाप क्रोध से बोल उठा, कब तक हम सहते जाएँगे,
कायर आतंकी के आगे, मौन खड़े रह जाएंगे।
नम थी आँखे किन्तु मन में, प्रतिशोध का ज्वाल था,
हर भारतवासी के मन मे, बसा हुआ महाकाल था।
मौन बने कायर ना समझो, ये तुमको बतला देंगे,
रोली कंगन चूड़ी को, ब्याज समेत चुका के आएंगे।
हम कान्हा के वंशज है, संस्कारी गाथा गाते हैं,
धर्म राष्ट्र की रक्षा को, नित चक्र चलाए जाते हैं।
आँसू पोछो हे वीरो, अब इनको ये बतला डालो,
खप्पर लेलो हाथो में, और चंड मुंड का नाश करो।
क्षमा याचना की रस्मो को, मन से दूर भगाओ तुम,
घड़ियाली आँसू वाले, पाखंडी दूर भगाओ तुम।
कब तक माफ करेंगे इनकी, कायरता गद्दारी को,
सिंहनाद का ज्वाल लिए, चिरो इन श्रृंगालो को।
देश भक्ति की परिभाषा, मैं तुम्हे बताने आया हूँ,
मैं भारत का सोया वो, आजाद जगाने आया हूँ।

- रवि यादव, कवि
कोटा, राजस्थान
2 वर्ष पहले
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