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चेतना का प्रवाह

Ravi Kumar Pandey

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            एक तरंग सी आएगी, अपने वेग में बहा ले जाएगी,
        
                                                    
                            
तू विस्मित खड़ा रहेगा, बस निहारता रह जाएगा।

सँभालने का अथक प्रयास करता रहेगा तू निरंतर,
पर स्वयं पर तेरा कोई अधिकार नहीं रह पाएगा।

तू बस एक मूक दर्शक बना रहेगा...
जल-कण तुझे उद्वेलित कर जाएँगे,
समीर के झोंके स्पर्श कर, अनकही कह जाएँगे।

जिज्ञासा यह है कि समाधान कहाँ है इस द्वंद्व का,
जिसे तू खोजता फिरेगा संपूर्ण सृष्टि में।

वह आएगी अत्यंत मौन से, तेरी अंतरात्मा को छूने,
और उसका रहस्य बस तेरे कर्ण-पटल में कह जाएगी।
3 महीने पहले
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