वह सुबह कभी तो आएगी, जब ख़ुशियाँ पुनः मुस्कुराएंगी,
नहीं रहेंगी गलियां सूनी, बाजारों में फिर से रौनक आएगी,
निराश नहीं होना है हमको, हताश नहीं होना है हमको,
हौसले बुलंदियों पर हों, ख़ुशियाँ फिर से द्वार खटखटाएंगी,
वह सुबह कभी तो आएगी, जब ख़ुशियाँ पुनः मुस्कुराएंगी।
डरना नहीं है, झुकना नहीं है, रुकना नहीं है कभी हमको,
जीतने की तरकीबें ही तो, हमारी खुशियां पुनः लौटाएंगी,
रूठ गईं जो ख़ुशियाँ हमसे, फ़िर वह अवश्य मान जाएंगी,
छोड़ गईं जो सुनहरी ऋतुएं, वो फ़िर से हमें गुदगुदाएंगी,
वह सुबह कभी तो आएगी, जब ख़ुशियाँ पुनः मुस्कुराएंगी।
जीवन इसी का नाम है, सुख-दुःख का आना जाना काम है,
सपनों में बीती हैं जो घड़ियाँ, समझदारी वही हमें लौटाएंगी,
जो चले गए हमें छोड़कर, उनकी केवल यादें ही रह जाएंगी,
जो जीवित हैं उन्हें बचा सकें, मेहनत तभी सफल हो पाएगी,
वह सुबह कभी तो आएगी, जब ख़ुशियाँ पुनः मुस्कुराएंगी।
रत्ना पांडे, वडोदरा (गुजरात)
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