विज्ञापन

तेरे आँसू यूँ ही गिरकर मिट्टी में खो न जाएँ

RATAN KUMAR

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तेरी आँखों के कोरों से क्यों अश्रु पिघलता है,
        
                                                    
                            
मन में कैसी बर्फ़ जमी है, कौन-सा दर्द मचलता है।
कुछ तो बोलो, तंद्रा तोड़ो, ख़ामोशी का पर्दा हटाओ,
भीगी पलकों से ही सही, कोई तो हिंट दे जाओ।

तेरे होंठों पर ठहरी है क्यों अनकही कहानी,
किसकी याद में डूबा है तेरी आँखों का पानी।
मैं तेरी ख़ामोशी पढ़ लूँ, इतना तो अधिकार दो,
दिल में जो तूफ़ान छिपा है, उसका कोई इज़हार दो।

पलकों पर ये मोती कैसे, किस ग़म की सौग़ात हैं,
तेरी हँसी के पीछे छिपे कितने टूटे जज़्बात हैं।
किसने तेरे ख़्वाबों को यूँ बिखरा-बिखरा कर डाला,
किसकी याद ने मन के आँगन में अँधियारा भर डाला।

तेरे नयनों में बादल हैं या सावन की तैयारी है,
या किसी बिछड़े हुए की याद तुझ पर आज भारी है।
मैं तेरे हर दर्द को अपनी धड़कन में भर लूँगा,
तू एक बार कह तो दे, मैं हर मुश्किल से लड़ लूँगा।

अब तो अपनी चुप्पी तोड़ो, दिल की गाँठें खोलो,
आँखों में जो राज़ छिपा है, पलकों से ही बोलो।
तेरे आँसू यूँ ही गिरकर, मिट्टी में खो न जाएँ,
मुझे इतना तो बता दो… ये अश्रु किसके नाम बह जाएँ?
-रतन कुमार कैथवास
2 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Updesh Kumar

13403 कविताएं

View Profile

Dr fouzia

6944 कविताएं

View Profile