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सीधी बातें, नाज बहुत है

RATAN KUMAR

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सीधी बातें, नाज़ बहुत है, दिल में तो अरमान बहुत हैं,
        
                                                    
                            
सोती आँखें हैरान बहुत हैं, जागे ख्वाब हजार बहुत हैं।
आँखों में जो ख़्वाब पले हैं, अब मंज़िल से दूर नहीं,
शीशमहल के पास खड़े हैं, बस हाथों में हाथ बहुत हैं।

रास्तों ने रोकना चाहा, पाँव मगर रुकते ही नहीं,
आँधियाँ चाहे लाख डराएँ, सपने फिर भी झुकते नहीं।
काँच की दीवारें सामने हैं, फिर भी दिल घबराता नहीं,
जिसके भीतर हौसला हो, उसके ख़्वाब कभी टूटते नहीं।

कल तक जिनको दूर समझा था, आज वही संसार है,
जिस मंज़िल की चाहत थी वो, आँखों के ठीक सामने है।
थोड़ा धीरज, थोड़ा साहस, थोड़ा खुद पर विश्वास रहे,
शीशमहल भी अपना होगा, बस सपने दमदार रहें।

सीधी बातें, सादा दिल है, फिर भी ख़्वाब महान बहुत हैं,
कम शब्दों में जीने वाले, दिल में आसमान बहुत हैं।
शीशमहल के पास खड़े हैं, अब लौटेंगे कैसे भला,
जब आँखों में मंज़िल हो तो, रास्ते भी क्या आसान बहुत हैं।
-रतन कुमार कैथवास
एक महीने पहले
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