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साँझ की बेला आज ठहर सी गई

RATAN KUMAR

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            साँझ की बेला आज ठहर सी गई क्यों,
        
                                                    
                            
क्या सितारों की तरफ़ से कोई पैग़ाम आया है?

आसमाँ आज लबालब भरा है तारों से,
लगता है चाँद ने भी कोई ख़त पहुँचाया है।

हवा भी आज कुछ कहकर गुज़री है पास से,
जैसे उसने तेरा कोई राज़ बताया है।

पेड़ों की शाखायें भी चुपचाप झूम रही हैं,
किसी ने शायद मौसम को गीत सुनाया है।

चाँदनी उतर आई है आँगन की देहरी पर,
किसने रात को इतना ख़ूबसूरत बनाया है।

दिल यूँ ही नहीं धड़कता आज बेवजह,
ज़रूर तेरी याद ने फिर मुझे बुलाया है।

साँझ की बेला आज ठहर सी गई क्यों,
शायद आसमाँ भी आज मेरा हाल समझ पाया है।
-रतन कुमार कैथवास
एक महीने पहले
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