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समुद्री झाग

RATAN KUMAR

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            समुद्र की लहरों पर जो झाग दिखाई देता है,
        
                                                    
                            
वो सिर्फ़ सुंदरता नहीं, एक कहानी कहता है।
पानी में घुली हवा जब लहरों से टकराती है,
सतह पर लाखों बुलबुलों की दुनिया बन जाती है।

नमक, जैविक पदार्थ और घुली गैसें मिलकर,
झाग को कुछ पल के लिए देते हैं आकार सँवरकर।
समुद्र जितना उथल-पुथल में आता है,
झाग का सफ़ेद विस्तार उतना बढ़ जाता है।

कभी ये प्राकृतिक प्रक्रिया का संकेत बन जाती है,
कभी समुद्र की उत्पादकता की खबर सुनाती है।
प्लवक (Plankton) और सूक्ष्म जीव जब समुद्र में बढ़ते हैं,
उनके कार्बनिक पदार्थ भी झाग में आ मिलते हैं।

मगर हर सफ़ेद झाग को प्रकृति का नाम न देना,
कभी प्रदूषण का असर हो तो उसे भी पहचान लेना।
रसायन और गंदा पानी जब समुद्र में आता है,
असामान्य झाग का खतरा भी साथ में लाता है।

लहरें मिटाती हैं झाग को, फिर झाग उभर आती है,
समुद्र की यही गति हमें बहुत कुछ समझाती है।
जो दिखता है ऊपर, उसके नीचे भी राज़ होता है,
समुद्र के हर बुलबुले में कोई न कोई अंदाज़ होता है।

इसलिए झाग को बस तस्वीर का हिस्सा न मानिए,
समुद्र की सेहत का भी एक इशारा जानिए।
लहरों की सफेदी में विज्ञान छिपा दिखाई देता है,
समुद्र अपने हाल का कुछ किस्सा कह देता है।
-रतन कुमार कैथवास
एक महीने पहले
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