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सारे घोड़े खोल दो पहले

RATAN KUMAR

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सारे घोड़े खोल दो पहले, फिर सपनों की बात करो,
        
                                                    
                            
खुद से लड़ना सीखो पहले, फिर अपनों की बात करो।
सूरज बनने की खातिर, फिर से तुमको तपना होगा,
राख में दबे अंगारों को, फिर से तुमको जगना होगा।

लहर-लहर दरिया के जैसे, कुछ सैलाब तो लाना होगा,
जो पत्थर राह रोकते हैं, उनमें रास्ता बनाना होगा।
आँधी से जो डर जाएँ, वो क्या तूफ़ान उठाएँगे,
जो गिरकर फिर उठते हैं, वही इतिहास बनाएँगे।

मंज़िल केवल चाहने से, कदमों में नहीं आती है,
रात कितनी भी गहरी हो, सुबह निकल ही आती है।
ख्वाब अगर सच करना है तो, नींद भुलानी होगी,
अपने हिस्से की धूप में, खुद को फिर जलानी होगी।

दुनिया क्या कहती है छोड़ो, अपना फैसला खुद करना,
भीड़ के पीछे मत चलना, अपना रास्ता खुद गढ़ना।
जिस दिन सीने में फिर से, जिद का ज्वार उठाना होगा,
उस दिन दुनिया को भी कहना… अब हमसे टकराना होगा।
-रतन कुमार कैथवास
एक महीने पहले
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