रेशम-रेशम बातें तेरी, महक उठे सारा आँगन,
तेरी हँसी से खिल जाए, जैसे सावन का मधुबन।
चाँद भी ठहरकर सुनता, तेरी मीठी-मीठी बोली,
तेरे संग हर शाम लगे, जैसे हो कोई रंगोली।
तेरी यादों की खुशबू से, भीग उठे मन का दर्पण,
रेशम-रेशम बातें तेरी, महक उठे सारा आँगन।
तेरी आहट पायल जैसी, तेरी चुप्पी मधुर तरंग,
तू जो पास रहे तो जैसे, हर मौसम में हो उमंग।
तेरे नाम की धुन छेड़े, दिल का हर इक कोमल स्पंदन,
रेशम-रेशम बातें तेरी, महक उठे सारा आँगन।
-रतन कुमार कैथवास