विज्ञापन

मोहब्बत की रवायत में जिए

RATAN KUMAR

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            पत्थर पे लिखोगे तो मिटा देगा ज़माना,
        
                                                    
                            
अल्फ़ाज़ में ढल जाएँ, तो सदियों से खड़े हैं।

हमे न तिजारत की, न शोहरत का सफ़र था,
बस दिल के उजालों को बचाने में लगे हैं।

मिट्टी का बदन है तो बिखर जाना भी होगा,
हम अपने ख़यालों में मगर आज भी जिए हैं।

तारीख़ के पन्नों पे नहीं नाम हमारा,
लोगों की दुआओँ में हमारी मौजूदगी यूँ ही नहीं है।

जिसने भी मोहब्बत को इबादत-सा निभाया,
उस शख़्स के क़दमों में कई दौर झुके हैं।

महलों की चमक, उम्र का पैमाना नहीं है,
टूटी हुई चौखट पे भी कुछ दीप जले हैं।

मरना तो सभी को है, ये किस्सा नया क्या है,
कुछ लोग मगर मर के भी किरदार बने हैं।

आवाज़ अगर सच हो तो दीवार नहीं रुकती,
हम अपनी सदा लेकर हवाओं में बहे हैं।

क़ब्रों में नहीं, दिल की ज़मीं पर हमें रखना,
हम लोग मोहब्बत की रवायत में जिए हैं।
-रतन कुमार कैथवास
2 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all