विज्ञापन

मन में तेरे ख्वाब बहुत है

RATAN KUMAR

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कहने को विश्वास बहुत है,
        
                                                    
                            
पर आँगन में बरसात बहुत है।

तेरे झुमके, तेरी बाली, कंगन से क्या बोल रहे हैं,
चुप करवा इनकी सरगोशी, सन्नाटों की रात बहुत है।

कहीं बात ज़ुबाँ तक आकर दुनिया में फैल न जाए,
तेरी आँखों में छुपा हुआ कोई बेचैन राज बहुत है।

मन के दरवाज़े खोलो, अब पर्दे सारे हटा दो,
मन में तेरे ख्वाब बहुत हैं, दिल में जज़्बात बहुत है।

तेरी पायल की छन-छन भी कुछ कहती रहती है,
तेरी इस ख़ामोशी में भी उसकी आवाज़ बहुत है।

बादल पूछ रहे हैं मुझसे, किसके इंतज़ार में हो,
क्या कह दूँ… उसकी यादों की बरसात बहुत है।

तुम चुप हो तो गहने बोलें, तुम बोलो तो दिल फिर बोले,
तेरी एक मुस्कान के आगे हर सौगात बहुत है।

कहने को विश्वास बहुत है,
पर आँगन में बरसात बहुत है,

मन के दरवाज़े खोलो…
मन में तेरे ख्वाब बहुत है।
-रतन कुमार कैथवास
5 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Ankit Kumar

10488 कविताएं

View Profile