मद्धिम आँच पे तू चाय चढ़ा,
मैं बिस्किट और आज का पेपर नीचे से लेकर आता हूँ।
तू अदरक ज़रा कूट लेना, मैं दूध भी ले आता हूँ,
सुबह की ठंडी हवा में थोड़ा सुकून ले आता हूँ।
तू कपों में चाय उड़ेलना, मैं कुर्सियाँ लगा दूँगा,
तेरी बातों के बीच अपना दिन सजा दूँगा।
अख़बार में दुनिया भर की ख़बरें होंगी शायद,
हम पहले एक-दूसरे का हाल पूछेंगे, फिर पढ़ेंगे शायद।
चाय की भाप में कल की सारी थकान उड़ जाएगी,
तेरी एक मुस्कान से सुबह और भी सुहानी हो जाएगी।
ना कोई बड़ी बात चाहिए, ना कोई बड़ी तैयारी,
बस तू चाय बना देना, मैं बिस्किट ले आऊँगा हमारी।
मद्धिम आँच पे चाय रहे, बातें देर तक चलें,
सुबह यूँ ही कटे अपनी, और दिन भर दिल में पलें।
-रतन कुमार कैथवास