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कोई गांव बसा ले तू

RATAN KUMAR

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            दिल के इतर भी कोई गाँव बसा ले तू,
        
                                                    
                            
यूँ ऐसे ही बैठे रहोगे तो सदियाँ लगेंगी उसे भुलाने में।

कुछ रास्ते उसकी यादों से अलग बना ले तू,
हर मोड़ पर वही मिल जाए तो क्या रखा है मुस्कुराने में।

आँखों में अब कोई नया ख़्वाब सजा ले तू,
हर ख़्वाब में वही उतर आए तो उम्र लगेगी ख़ुद को समझाने में।

उसके हिस्से की शामें किसी और के नाम कर ले अभी तू,
हर शाम उसी के नाम रहे तो क्या फ़ायदा सूरज डूबने में।

दिल को भी कभी अपने हाल पर छोड़ दिया कर तू,
हर धड़कन से उसका पता पूछेगा तो देर लगेगी धड़कने में।

कुछ किस्से अधूरे ही रहने दे, उन्हें मिटा मत तू,
हर पन्ना कुरेदोगे तो सारी उम्र लगेगी कहानी मिटाने में।

वक़्त को अपना काम करने दे, तू अपना नया जहाँ बना ले तू,
हर ज़ख्म को सहलाओगे तो देर लगेगी ज़ख्म को भरने में।

दिल के इतर भी कोई गाँव बसा ले तू,
एक शख़्स को भूलने में यूँ पूरी ज़िंदगी मत लगा तू।
-रतन कुमार कैथवास
एक महीने पहले
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