विज्ञापन

किरदार खत्म होने पर

RATAN KUMAR

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अभी मेरी तस्वीर के आगे,
        
                                                    
                            
दीये भी जलेंगे, फूल भी चढ़ेंगे,
कल अगर साँसों के साथ लौट आया,
तो वही लोग हिसाबों की किताबें खोल देंगे।
अभी कहेंगे… "बहुत अच्छा इंसान था",
हर महफ़िल में मेरा ज़िक्र करेंगे,
कल मेरी राय उनसे अलग हुई,
तो मेरे किरदार के टुकड़े-टुकड़े कर देंगे।
मैं चुप था तो शरीफ़ कहलाया,
बोल पड़ा तो बाग़ी ठहरा दिया,
इस शहर का दस्तूर बड़ा अजीब है,
ज़िंदा आदमी से ज़्यादा, उसकी यादों को सजा दिया।
कब्र पर रखे गुलाबों से मैंने पूछा,
"इतनी मोहब्बत पहले कहाँ थी?"
हवा मुस्कुराकर धीरे से बोली,
"लोग अक्सर, खो देने के बाद निभाते हैं,
साथ रहते हुए निभा नहीं पाते।"
इसलिए अब किसी की आँखों के आँसू देखकर
अपनी कीमत मत आँकना,
कई बार मातम, मोहब्बत का नहीं,
ज़माने की रस्म का हिस्सा होता है।
और अगर कभी, सचमुच लौटकर आ भी गया,
तो शायद सबसे पहले यही सुनूँगा..
"तुम्हें तो मर जाना चाहिए था…"
तब समझ जाऊँगा,
मेरी मौत पर जो रो रहे थे,
वो मेरे जाने पर नहीं,
अपनी कहानी में, मेरा किरदार ख़त्म होने पर रो रहे थे।
-रतन कुमार कैथवास
3 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all