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कैसे इक़रार करूँ

RATAN KUMAR

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सरे राह कैसे इकरार करूँ,
        
                                                    
                            
चाँद ने सितारों से कहा,
चाँदनी कब से रूठी हुई है।
सितारों ने हौले से मुस्कुराकर कहा,
"वो नाराज़ नहीं है, बस तेरे इंतज़ार में चुप हुई है।"
जिसे हर रात तेरी आगोश में आना था,
वो आज बादलों की ओट में कहीं खोई हुई है।
चाँद बोला,
"मैं भी तो हर शाम उसी की राह तकता हूँ,
मगर वक़्त की धूल मेरे चेहरे पर उतर आती है।
कुछ फ़ासले आसमान नहीं बनाता,
कुछ दूरियाँ ख़ुद ख़ामोशियाँ बढ़ा जाती हैं।"
सितारे फिर बोले,
"मोहब्बत अगर सच्ची हो, तो शिकवे कम किया करो,
रातें लंबी सही, मगर सुबह का यक़ीन रखा करो।
जो चाँदनी सच में तेरी हुई,
वो किसी बादल की कैद में कब तक रहेगी?"
चाँद ने नज़र झुकाकर कहा,
"इकरार का वक़्त भी आएगा,
मगर सरे राह दिल की नीलामी नहीं करूँगा।
मोहब्बत अगर पाक है,
तो उसे तमाशा भी नहीं बनने दूँगा।"
फिर आसमान ने देखा,
चाँद पहले से ज़्यादा चमक रहा था,
और चाँदनी धीरे-धीरे उसकी आगोश में लौट रही थी।
तब सितारों ने मुस्कुराकर कहा…
"जो रिश्ते शोर से नहीं, सब्र से निभाए जाते हैं,
उन्हीं के हिस्से सबसे रौशन रातें आती हैं।"
-रतन कुमार कैथवास
2 महीने पहले
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