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हमने हबीबों के दिलों में जहर देखें हैं

RATAN KUMAR

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            समंदर का ख़ौफ़ न दो हमको जनाब,
        
                                                    
                            
हमने हँसते गालों में भँवर देखे हैं।
तुम क्या दिखाओगे तूफ़ानों का मंजर,
हमने ख़ामोश आँखों में शहर देखे हैं।

हमें लहरों की ऊँचाई से मत डराओ,
हमने साहिल पे डूबते सफ़र देखे हैं।
तुम्हें नाज़ है अपनी कश्ती पर तो रहे,
हमने काग़ज़ की नावों में हुनर देखे हैं।

हर मुस्कुराता चेहरा, सच्चा नहीं होता,
हमने हबीबों के दिलों में, ज़हर देखे हैं।
तुम क्या परखोगे, हमारी शख़्सियत को,
हमने वक़्त की आँखों में, कहर देखे हैं।

हमें गिरने का डर दिखाते हो तुम,
हमने गिरकर उठते हुए बशर देखे हैं।
तुम्हारी धमकियों से काँप जाएँगे हम,
ऐसे कमज़ोर इरादे किधर देखे हैं?

हम समंदर हैं, गहराई का अंदाज़ा रखो,
हमने सीने में दबाए कई शहर देखे हैं।
हमसे आँखें मिलाकर बात करना जनाब,
हमने चेहरे के पीछे छुपे भँवर देखे हैं।
-रतन कुमार कैथवास
2 दिन पहले
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