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धैर्य का दीप

RATAN KUMAR

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मत कर जल्दी, लगा ले हल्दी,
        
                                                    
                            
हर काम की होती है अपनी एक अवधि।

धूप को भी सुबह से शाम तक,
अपनी मंज़िल तय करनी पड़ती है,
बीज अगर कल ही बोया हो,
तो फसल कहाँ अगले दिन मिलती है।

कच्चे आम को तोड़ोगे,
खट्टापन ही हाथ लगेगा,
वक़्त का स्वाद जो समझ गया,
वही मीठा फल चखेगा।

नदी भी पत्थरों से टकराकर,
अपना रास्ता बनाती है,
जो ठहरकर चलना सीख गया,
मंज़िल उसी को गले लगाती है।

बाज़ कभी घबराकर नहीं उड़ता,
पहले हवाओं को पढ़ता है,
फिर एक ही उड़ान में,
आसमान का नक्शा बदलता है।

शोर से काम नहीं बनते,
सब्र से तस्वीर सँवरती है,
जो पसीने को पूजा समझे,
किस्मत भी उसी पर मरती है।

मत कर जल्दी, लगा ले हल्दी,
कुदरत का हर फ़ैसला, अपनी घड़ी पर आता है,
जो धैर्य का दीप जलाए रखता है,
वही जीवन का असली रंग पाता है |
-रतन कुमार कैथवास
3 महीने पहले
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