मेरी आँखों में अभी ख़्वाबों का मौसम बाक़ी है,
आप इक बार इन्हें अपनी नजरों से महका तो दीजिए।
मैं तो मुद्दत से खड़ा हूँ किसी साहिल की तरह,
आप लहरों को मेरी ओर रवाना तो कीजिए।
धूप में जलता रहा हूँ मैं किसी रेगिस्तान की तरह,
आप आकर मेरी खारिज नजरों को दरिया तो कीजिए।
दिल की वीरानी में आवाज़ आपकी गूँजे,
आप अपनी ख़ामोशियों को आज तरन्नुम तो कीजिए।
मैंने माँगा नहीं दुनिया से कोई ताज कभी,
बस मेरे हिस्से में थोड़ा-सा उजाला तो कीजिए।
आप चाहें तो ये दूरी भी मिटाई जा सकती है,
दोस्ती का एक कदम आप बढ़ें, एक मैं बढूं।
-रतन कुमार कैथवास