आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

दरिया तो कीजिये

                
                                                         
                            मेरी आँखों में अभी ख़्वाबों का मौसम बाक़ी है,
                                                                 
                            
आप इक बार इन्हें अपनी नजरों से महका तो दीजिए।

मैं तो मुद्दत से खड़ा हूँ किसी साहिल की तरह,
आप लहरों को मेरी ओर रवाना तो कीजिए।

धूप में जलता रहा हूँ मैं किसी रेगिस्तान की तरह,
आप आकर मेरी खारिज नजरों को दरिया तो कीजिए।

दिल की वीरानी में आवाज़ आपकी गूँजे,
आप अपनी ख़ामोशियों को आज तरन्नुम तो कीजिए।

मैंने माँगा नहीं दुनिया से कोई ताज कभी,
बस मेरे हिस्से में थोड़ा-सा उजाला तो कीजिए।

आप चाहें तो ये दूरी भी मिटाई जा सकती है,
दोस्ती का एक कदम आप बढ़ें, एक मैं बढूं।
-रतन कुमार कैथवास
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
34 मिनट पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर