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बिना खोले पढ़ ले

RATAN KUMAR

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            उसने कहा था, तलाश उसकी करो,
        
                                                    
                            
जो बिना कहे ही,
मेरे अंदर क्या चल रहा है,
उसको परख ले।

जो मेरी ख़ामोशी में भी,
सवालों की आहट सुन ले,
मेरी मुस्कुराहट के पीछे छिपे,
आँसुओं का रंग पहचान ले।

जो हर बार वजह न पूछे,
बस कंधे पर हाथ रख दे,
और कहे…
"आज तुम्हारी आँखें, कुछ और ही कहानी कह रही हैं।"

जिसे मेरे शब्दों से नहीं,
मेरे ठहराव से मोहब्बत हो,
जो धड़कनों की लड़खड़ाहट में भी,
मेरे यक़ीन की आवाज़ सुन ले।

जो मेरी हार पर ताने नहीं,
हौसलों का दीप जला दे,
और जीत मिलने पर भी
मुझे ज़मीन से जुड़ा रहने की सीख दे।

तलाश उसी की करना,
जो भीड़ में तुम्हारा नाम नहीं,
तुम्हारी तन्हाई पुकारे,
जो तुम्हारी मौजूदगी नहीं,
तुम्हारी कमी महसूस करे।

क्योंकि इश्क़ सिर्फ़ साथ चलने का नाम नहीं,
किसी के भीतर उतर जाने का हुनर भी है,
और जो तुम्हारे दिल की किताब,
बिना खोले पढ़ ले,
समझ लेना…
रूह ने अपनी मंज़िल पा ली है।
-रतन कुमार कैथवास
3 महीने पहले
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