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बस एक कतरा है, जो हमसे संभाला नहीं जाता

RATAN KUMAR

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            एक समंदर है जो मेरे क़ाबू में है,
        
                                                    
                            
एक क़तरा है, जो मुझसे सँभाला नहीं जाता।
दुनिया जीतने का, हुनर रखते हैं हम,
एक दिल है जो, हमसे सँभाला नहीं जाता।

लहरों को हुक्म देकर, तूफ़ान मोड़ देते हैं,
एक याद है जो, दिल से निकाला नहीं जाता।
महफ़िल में हँसकर, हर दर्द छुपा लेते हैं,
एक आँसू है जो, पलकों से टाला नहीं जाता।

हमने पत्थरों में भी, रास्ते बना डाले,
एक ख़्वाब है जो, आँखों से निकाला नहीं जाता।
लोग कहते हैं कि, हम बड़े मज़बूत हैं,
एक नाम है जो, लबों से भुलाया नहीं जाता।

हज़ारों फ़ैसले, हम बेख़ौफ़ कर लेते हैं,
एक फ़ैसला है जो, दिल से लिया नहीं जाता।
दुनिया की हर शै पर, हुकूमत रही अपनी,
एक शख़्स है जो, अपना बनाया नहीं जाता।

ये कैसी कशमकश है, कैसा अजब कारोबार है,
जिसे चाहें वही, मुक़द्दर में लिखा नहीं जाता।
समंदर को समेटा है, अपनी हथेलियों में,
बस एक क़तरा है, जो हमसे सँभाला नहीं जाता।
-रतन कुमार कैथवास
2 दिन पहले
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