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अपनी ये सरगोशी चले

RATAN KUMAR

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            समंदर का लिहाफ़ बना डालो, छत पर बिछौना बिछाओ,
        
                                                    
                            
आकाश के तारों तले अपनी ये सरगोशी चले।

चाँद को थोड़ा पास बुलाओ, रात को और सजाओ,
खामोशियों के बीच कोई मीठी-सी बंदिश चले।

लहरों की आवाज़ सुनें हम, साँसों की आहट चुनें हम,
तेरी मेरी धड़कनों में कोई धीमी-सी बंदिश चले।

हवा अगर पूछे राज़ हमारा, कह देना ये उलफ़त है सारा,
रात की चादर तले फिर दोनों की गुफ़्तगू चले।

रेत पे लिख दें नाम तुम्हारा, लहरें आकर करें इशारा,
मिट भी जाए लिखावट लेकिन दिल में वही आरज़ू चले।

नींद अगर आँखों में आए, ख्वाब तुम्हारा बनकर आए,
सुबह तलक इस रात में बस तेरा ही जादू चले।
-रतन कुमार कैथवास
14 घंटे पहले
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