विज्ञापन

सावन की बरसातों में

Ranjeeta Karade

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बहा दो सारे दर्द ओ गम
        
                                                    
                            
इन बारिश की बरसातों में
रह जाएं न कोई सवाल
इन भीगी भीगी पलकों में
छिपाये रखा हैं जिस दर्द को
बरसों से इस दिल में
आज बह जाने दो सारे दर्द
इन सावन की रातों में
कुछ यादें जो अब भी
महकती हैं इन सांसो में
धूल जाने दो उन यादों को
इन सावन की बरसातों में
थक चुका हैं दिल
बहुत मुस्कुराते मुस्कुराते
रो लेने दो न आज जी भर कर
इन सावन की बरसातों में
2 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all