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वो तो सुनती नहीं है, दुनिया दीवानी है

Ranjeet Thakur

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            1.कॉलेज के दिन मेरे,भूले से न भूलते हैं.
        
                                                    
                            
भूल जाऊँ बात वो तो काहे की जवानी है।


नींद जो न अब आती, आती तब भी कहाँ थी।
आँख ये चढ़ी हुई जो, प्यार की निशानी है।


घूमता था आगे पीछे,बात वो न सुनती थी,
अजब गजब सी ये प्रेम की कहानी है।


कविता या छंद मुझे, कुछ लिखना नहीं है
वो तो सुनती नहीं है,. दुनिया दीवानी है।


2. पायलों की छम छम, केश काली बदरी है।
साँवरी सूरत जैसे ,परियों की रानी हो।


बातें तेरी खन खन कलेजे को लगतीं है।
शब्दवेधी वाण जैसे कोई ये कहानी हो।


आँखे कजरारी तेरी, होठ मधुशाला लगे,
अधर ये तेरा जैसा, मदिरा पुरानी हो।


चाल मतवाली तेरी, हिरनी सी मदमाती।
शरमाती ऐसे जैसे,पगली दीवानी हो।




3.चंचल है चितवन,राधा सी तू लगती है।
कृष्ण गोपाला बन, रास भी रचाऊंगा।


तिरछे नयन तेरे,मधुर वचन तेरे,
सुन तेरी तान राधा, दौड़ा चला आऊँगा।


चाहे रहें गोपियाँ भी, आसपास ढेर सारी,
भूल के भी राधा तोहे, कभी ना भुलाऊंगा।


चाहे तुम नहीं आओ, तान सुन बाँसुरी की।
आदत बुलाने की है, बाँसुरी बजाऊँगा।


4. जेवर भी फीका लगे, सादगी गजब की है,
रूप अनमोल जैसे, चाँद की चकोरी है।


झुमका बरेली वाला, लटक झटक खेले,
हंसिनी भी मात खाये, इतनी तो गोरी है।


कितनी बताऊं बात ,सुनो रूप रंग की मैं।
आभा है तू रवि की या, रूप की तिजोरी है।


सांवला मैं इतना हूँ, गोरी तू भी उतनी है।
दुनियाँ कहे कि राधा कृष्ण की जोड़ी है।


रंजीत ठाकुर


- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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