विज्ञापन

सुकून-ए-ज़िंदगी

Ranjana Sood

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हमें याद है तुम्हारा वो मुड़-मुड़ के देखना,
        
                                                    
                            
वो हल्के से ज़ुल्फ़ों को हाथों से संवारना।
फिर धीरे से आगे चलते हुए, पीछे चले आना,
हमें हमीं से, चुपके से, नज़रों से चुरा ले जाना।
मानो कुछ न किया हो, ऐसी मासूमियत जतलाना,
महफ़िल में हमसे सौ गज़ की दूरी का नाटक दिखाना।
ना हिसाब, ना किताब, बस एक ज़हीन किरदार,
हमारे लिए सुकून-ए-ज़िंदगी के पन्ने लिखते जाना।
3 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all