विज्ञापन

पहला आलम

Ranjana Sood

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हमको अब तक उस दीवानगी का,
        
                                                    
                            
पहली मर्तबा का वो आलम याद है।
सुर्ख़ हया से रंगीं वो शाम थी,
मदमस्त, बहकी, नशीली-सी शाम याद है।
ख़ामोश लब थे हम दोनों के,
गवाह बस टिमटिमाते सितारे थे।
इश्क़ का जादू दिलों में समाता गया,
और स्याह रात ने घूँघट गिरा दिया।
वो लम्हा आज भी धड़कता है दिल में,
वो ख़ामोशी अब भी गुनगुनाती है।
वक़्त की गर्द में सब कुछ धुँधला हुआ,
बस वो पहली शाम और निखर आती है।
2 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all