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वाक़ई पंख निकल उड़ आयें

Ranjana Sood

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हवा में अब बसेरा बना पायें
        
                                                    
                            
वाक़ई पंख निकल उड़ आयें

मन चाहा तो पड़ोसी से हाथ मिलायें
वरना कहीं उड़ का दूर निकल जाएँ

सड़क या पहाड़ , धक्के मौत के बार बार
परिवार की कलह से मुक्ति पा जाएँ

पेट भी भरा रहे, राहें भी जुदा जुदा
तेरा अलग मेरा अलग रास्ता।
3 महीने पहले
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