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जब मैं आऊंगा

Rani Pundir

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बुढ़ापा कहता है जब मैं आऊंगा तो रजत से बाल होंगे,
        
                                                    
                            
दर्पण में झुर्री भरा मुख होगा, चाल में थोड़ा मलाल होगा
आंखे धुंधला जाएंगी लेकिन अंतर्मन में ज्ञान होगा,
पोटली बंद करके लाऊंगा मैं तजुर्बों की,
और उन तजुर्बा का सम्मान भी होगा,
कांपते हाथों में लाठी थमाकर,
पुरानी यादों को दोहराऊंगा
ऐ ! राही तुम घबराना नहीं,
मैं अंत नहीं जीवन का मैं तो आरंभ हूं ।
एक महीने पहले
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