बिल्कुल दूर दराज देहात हो गांव हो कस्बा हो या फिर हो शहर,
आज दीपावली की रात है इसलिए वो अंधेरा कहीं नहीं पाएगा ठहर,
जो काला भयानक अंधेरा दिन का उजाला खत्म होते ही और,
सूरज के ढलते ही चारों ओर छा जाता था होते ही साझ की पहर|
-मनस्व