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वो अंधेरा नहीं पाएगा ठहर

Ramjeet pal

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बिल्कुल दूर दराज देहात हो गांव हो कस्बा हो या फिर हो शहर,
        
                                                    
                            
आज दीपावली की रात है इसलिए वो अंधेरा कहीं नहीं पाएगा ठहर,
जो काला भयानक अंधेरा दिन का उजाला खत्म होते ही और,
सूरज के ढलते ही चारों ओर छा जाता था होते ही साझ की पहर|
-मनस्व
एक घंटा पहले
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