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झूठ का तुम करते रहो सदैव ही सच्चे हृदय से तिरस्कार

Ramjeet pal

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सच कहता है कि बेशक मुझको नहीं चाहिए कोई भी पुरस्कार,
        
                                                    
                            
और ना ही चाहत है सच की कि ये दुनिया उसको करें नमस्कार,
सचमुच चाहता है सच सिर्फ इतना कि रहो चाहे किसी भी हाल में,
बस झूठ का तुम करते रहो सदैव ही सच्चे हृदय से तिरस्कार|
-मनस्व
2 महीने पहले
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