सच कहता है कि बेशक मुझको नहीं चाहिए कोई भी पुरस्कार,
और ना ही चाहत है सच की कि ये दुनिया उसको करें नमस्कार,
सचमुच चाहता है सच सिर्फ इतना कि रहो चाहे किसी भी हाल में,
बस झूठ का तुम करते रहो सदैव ही सच्चे हृदय से तिरस्कार|
-मनस्व