हर कोई जीवन की प्यास बुझाने के लिए भटक रहा है दर-दर,
कोई भटक रहा है बाहर तो कोई भटक रहा है खुद के ही अंदर,
सचमुच तुम्हारी ये जीवन की प्यास यह जीवन की तृष्णा तब तक बढ़ती,
ही जाएगी जब तक तुम एक मात्र बूंद की प्यास लिए ढूंढते फिरोगे समंदर|
-मनस्व