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आत्मा माया में क्यों थी अब तक आबद्ध

Ramjeet pal

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जब एक योगी साधना हेतु शरीर मन बुद्धि इंद्रियों को करके सूचीबद्ध,
        
                                                    
                            
बैठ जाता है सत्य एवं ज्ञान की प्राप्ति तक के लिए हो करके प्रतिबद्ध,
तब सचमुच उसकी आत्मा न सिर्फ सदा सदा के लिए मुक्त हो जाती है बल्कि,
उसे यह भी मालूम हो जाता है कि उसकी आत्मा माया में क्यों थी अब तक आबद्ध|
-मनस्व
17 घंटे पहले
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