जब एक योगी साधना हेतु शरीर मन बुद्धि इंद्रियों को करके सूचीबद्ध,
बैठ जाता है सत्य एवं ज्ञान की प्राप्ति तक के लिए हो करके प्रतिबद्ध,
तब सचमुच उसकी आत्मा न सिर्फ सदा सदा के लिए मुक्त हो जाती है बल्कि,
उसे यह भी मालूम हो जाता है कि उसकी आत्मा माया में क्यों थी अब तक आबद्ध|
-मनस्व