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सुदर्शन वाले साँवरा

Ramesh maanju

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सुदर्शन वाले साँवरा, तू मधुर डोर अपनाय,
        
                                                    
                            
क्षणिक संसार के मेहमानों में, पुनः प्रेम भर जाय।

कुछ दशकों के लिए आए हैं, इस धरा पर वीर,
मेरा-तेरा करते-करते, टूट गया घर-बार,
ननद-भाभी के तनाव में, पिस रहा परिवार।

दो दशकों तक साथ खेले, ईश्वर था वो वीर,
प्रथाओं के चक्कर में, दूर हो गया वीर।

सुन बहना, तू बात वीर की, मैं तो वही पुराना हूँ,
मेरे लिए तो ताज है तू, दौलत की दरिया बहना।

किसको समझाऊँ ऐ राखी दास्ताँ, दोनों तरफ नारायणी है,
एक तरफ तो ताज है मेरा, एक तरफ है घर की लाज।

सुन सुदर्शन वाले साँवरा, एक वीर की सच्ची पुकार,
लाज और ताज को एक कर दे, घर मेरा हो पुनः आबाद।।
-रमेश मांजू
एक महीने पहले
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