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उद्धृत हुई जहाँ कही से भी यह जाति

Ramanand Yadav

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            उद्धृत हुई जहाँ कही से भी यह जाति, है जो सकुनी,शूर्पणखा,जयचंद की भांति ,
        
                                                    
                            
कारण जिस हुआ सर्वथा मानवता,राष्ट्र उन्नत में घात ,
इसे भी त्यागेंगे सतीप्रथा,भूतवादिता आदि की भांति 


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6 वर्ष पहले
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