गिरि की अधित्यिका में संस्थित है नगर एक
पीलीभीत नाम से जो लोक विख्यात है
देवहूति तट पर बसा है रम्य नगर यह
उत्तराखंड का यही प्रवेश द्वार है
अनुपम है साम्य यहां ग्रीष्म वर्षा शरद का
ऋतुराज का तो यहां पूर्ण साम्राज्य है
वन वीथी लता कुंज आव्रत संपूर्ण जिला
गज केहरि मृग शावको का अधिष्ठान है
भोले भाले सौम्य सरल ग्राम्य और नागर जन
सभी जाति धर्मों का समन्वय महान है
असम चौराहे से न्याय पथ तक निवास
दुग्धेश्वर से माधव पंथ तक विस्तार है
पब्लिक स्कूल यहां उगे कुकुरमुत्तों जैसे
विद्या भारती का भी इनमें योगदान है
निज वित्तपोषित महाविद्यालय हैं अनेक
राजकीय और उपाधि लोक संस्थान है
क्लीनिक अनेक यहां विविध नाम रूप धारे
चिकित्सकों की जहां खूब भीड़ भाड़ है
धन की उगाही में परम चतुर एक जैसे
सब की औषधियों के पृथक पृथक नाम हैं
कृषि उत्पादन में जनपद यह अग्रगण्य
गन्ना गेहूं धान का यहां कीर्तिमान है
एक ओर शारदा विराजें इस जनपद में
गोमती नदी का यहां उद्गम स्थान है
शारदा नहर जो है यूपी में सबसे बड़ी
जिले की हरियाली में उसका योगदान है
पांच चीनी मिले इस जिले में क्रियाशील
समुचित मूल्य प्राप्ति से कृषक खुशहाल हैं
राजनीति अन्य जनपदों से तनिक बेहतर है
यद्यपि प्रशंसा जैसा नहीं कुछ काम है
उत्तर में रुद्रपुर दक्षिण शाहजहांपुर पश्चिम बरेली पूर्व खीरी विद्यमान है
यदा कदा बाढ़ और सूखा का प्रकोप क्षणिक
सारे समय समशीतोष्ण गतिमान है
पुरातात्विक दृष्टि से जनपद समृद्ध अति
बलईखेड़ा चक्र तीर्थ प्राच्य थल विख्यात हैं
भूमि यहां की खूब उर्वर है ठीक वैसी
जैसी यहां की जनसंख्या गतिमान है
-राम प्रकाश मिश्र वत्स