विज्ञापन

सभी शोक व दुख दर्दों को माता हैं हरने वाली।।

Ram Naresh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मां शक्ति का चौथा स्वरूप कुष्माण्डा कहलाता है।
        
                                                    
                            
नवरात्रि के चौथे दिन इनको ही पूजा जाता है।।
थी न कोई प्रकाश किरण चारों तरफ अंधेरा था।
ना था कोई जीव-जन्तु न कहीं कोई बसेरा था।।
सृष्टि की रचना करने मां कुष्माण्डा ने अवतार लिया।
अपनी मंद हंसी से ही ब्रह्माण्ड का निर्माण किया।।
सूर्यलोक मे वास है इनका तेज नियंत्रित करने वाली हैं।
थोड़ी सी उर्जा से ही ब्रह्माण्ड को रचने वाली हैं।।
मां कुष्माण्डा ने विष्णु, ब्रह्मा व शंकर को प्रकट किया।
विष्णु को भरण ब्रह्मा को सृजन शंकर को क्षरण कर्तव्य दिया।।
मां के आठ भुजाएं हैं वो अष्टभुजा कहलाती हैं।
भक्तों को आठ सिद्धियां व नौ निधियां देने वाली हैं।।
कुम्हणे की बलि चढ़ाकर करते पूजा की तैयारी।
सभी शोक व दुख दर्दों को माता हैं हरने वाली।।
एक दिन पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Aditya Mishra

1 कविता

View Profile