विज्ञापन

कान्हा,काहें चुराये माखन

RAKESH SABHAJEET MAURYA

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            काहे चुराये माखन,वो कान्हा
        
                                                    
                            
काहें चुराये माखन।

जा के बताऊंगी तोरी हरकत,
माता यशोदा को।
चुपके चुपके ना जाने कब,
चट कर जाये माखन को।

कान्हा बोले मुस्काकर,
तू मत कर इतना शोर।
माखन बिना जग सूना,
सुन वो अलबेली छोर।

किसको सुनाऊं बातें अपनी,
मैय्या की गोद है सबसे प्यारी।
हर दिन मैं चोरी करता,
फिर भी है सबसे न्यारी।

मै तुझसे हो जाऊँ ख़फ़ा,
तेरी तो हो जाये मजा।
चारों तरफ से घेरा डाले,
खड़ी सब ग्वालन की छोर।

कभी जो पकड़े जायें,
मुस्कान से दिल भर लूं।
पीछे पीछे आके भेद जिया के,
तुम्हारे सब मैं खोलूँ।
तू अनजान प्रेम सुख से,
कैसे समझाऊँ तुझे वो राधा।
माखन का स्वाद निराला,
एक बार चख के माखन फिर से चुराने चल दूं।
कैसे समझाऊँ तुझे वो राधा।।
काहें चुराये माखन।
वो कान्हा काहें चुराये माखन।

- राकेश मौर्य
बी- ९०८, मेट्रो रेजीडेंसी ,नेतिवल,कल्याण-४२१३०६, महाराष्ट्र
यह रचना मेरी स्वरचित हैI धन्यवाद I
2 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Updesh Kumar

12614 कविताएं

View Profile

Nathuram Kaswan

8654 कविताएं

View Profile

User

29 कविताएं

View Profile

Jeewan Singh

97 कविताएं

View Profile

Mamta Tiwari

639 कविताएं

View Profile