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अभी तो कब्र ए अजहर पर, हमे फातिहा पड़ना है,

Rakesh Gupta

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अभी बदला नहीं पूरा, अभी बदला अधूरा है,
        
                                                    
                            
अभी वो आँख है कायम, जिसने मेरा देश घूरा है।
अभी तो कब्र ए अजहर पर, हमे फातिहा पड़ना है,
अभी हाफिज सईद से भी, होनी कुश्ती नूरा है।

अभी खुद मेरे घर मे बहुत से, जयचन्द बाकी है,
वतन को तोड़ना चाहे वो कुछ मतिमन्द बाकी है,
अभी कीचड़ उतरकर के हमे खुद साफ करनी है,
सियासत की वो बदबूदार अभी दुर्गंध बाकी है।

टुकड़ा गैंग जिंदा है, अभी शिक्षा के मंदिर में,
तिरंगे को जलाने की नई, तरकीबें कश्मीर में,
आतंकी की फाँसी पर जो शर्मिंदा बहुत होते,
उन्हें कब मौत आई है, वो जीवित है मेरे घर में।

अभी कश्मीर में नफरत के गिद्ध, परवाज़ करेंगे,
कुटिल पाक के मंसूबे पूरे , ये पत्थरबाज करेंगे,
वो जो पाक परस्त है, जयचन्द मेरे भारत के,
वो रो कश्मीर की जनता से, फिर आवाज़ करेंगे

खाते हिन्द की गाते सदा ही, पाक का गाना,
कानून ऐसा बनना है, उन्हें हो पाक ही जाना,
भारत मात के भटके ये बेटे, है नही हरगिज,
कोई बेटा कब चाहे, खुद ही माता को मिटाना।


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