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"हे भारत मां तू ही बतला"

Rajnish Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कहूँ विश्व का ताज तुझे या, मजलूमों की आवाज कहूं ।
        
                                                    
                            
राग कहुँ या साज कहूँ या, हर शह का परवाज़ कहूँ
हे भारत मां तू ही बतला, मैं आज तेरा क्या नाम कहूं।।
मंदिर की हर घंटी में तू, या मस्जिद की तुझे अजान कहूँ।
वेदों की तुझे ऋचा बोलूँ, गुरु साहिब की अरदास कहूँ।
हे भारत मां तू ही बतला, मैं आज तेरा क्या नाम कहूं।।
कल के निर्माता युवा तेरे, इनकी दृढ़ पहचान कहूं,
सपनों को जो साकार करें, वह जलता हुआ अरमान कहूं।
हे भारत मां तू ही बतला, मैं आज तेरा क्या नाम कहूं।।
गिर कर उठना, फिर चलना, यह जिद्द जो हार न मान कहूं,
आँखों में है जो भविष्य बसा, उस अटल विश्वास का नाम कहूं।
हे भारत मां तू ही बतला, मैं आज तेरा क्या नाम कहूं।।
चंद्रयान की उड़ान कहूं, या मंगल तक की शान कहूं,
इसरो के हर वैज्ञानिक की, मेहनत की पहचान कहूं।
हे भारत मां तू ही बतला, मैं आज तेरा क्या नाम कहूं।।
डिजिटल क्रांति का दीप कहूँ, या नवाचार की उड़ान कहूं,
प्रति पल चढ़ता जो सूरज है, उसकी किरणों को ज्ञान कहूं।
हे भारत मां तू ही बतला, मैं आज तेरा क्या नाम कहूं।।
जिस मां ने बेटे बलिदान किए, उस मां का त्याग महान कहूं,
आंसू पीकर मुस्काए जो, उस पिता का हर बलिदान कहूं।
हे भारत मां तू ही बतला, मैं आज तेरा क्या नाम कहूं।।
घर में जलती अखंड ज्योति, सूनी आंखों की पहचान कहूं,
है कोटिश नमन और वंदन, तेरा ऋणी हिंदुस्तान कहूं।
हे भारत मां तू ही बतला, मैं आज तेरा क्या नाम कहूं।।
तुझे कर्म कहूँ या धर्म कहूँ, तुझे सत्य कहूँ या ईमान कहूं,
है "प्रखर" सांस में सदा बसे ,वह जीवन का वरदान कहूं।
हे भारत मां तू ही बतला, मैं आज तेरा क्या नाम कहूं।।
— रजनीश कुमार मिश्र "प्रखर"
2 महीने पहले
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