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शीर्षक: एक कप चाय और तुम

Rajni Riyal

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            दवा का काम करती है, दुआ का रूप होती है,
        
                                                    
                            
ये कड़क चाय भी साहब, बड़े गज़ब की चीज़ होती है।

ज़माने भर के झंझट और दफ़्तर की वो थकान,
एक चुस्की में इसकी, जैसे लौट आती है जान।

कुल्हड़ की वो सोंधी महक और अदरक का वो स्वाद,
मौसम कोई भी हो, बस इसकी आती है याद।

अमीरी-गरीबी का कोई भेद नहीं रखती ये,
नुक्कड़ से लेकर महलों तक, सबका दिल जीतती है।

प्याली से उठता वो धुआँ, जैसे कोई हसीन ख़्वाब हो,
जो हर उलझन को सुलझा दे, वो इकलौता जवाब हो।

रिश्ते-नाते, दोस्ती और अपनों का वो साथ,
अधूरी है हर महफ़िल, जो न हो चाय की बात।
-रजनी रियाल 
3 महीने पहले
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